निपात ( व्याकरण से आंशिक )
निपातों का प्रयोग कही गई बात पर बल देने के लिए किया जाता है। व्याकरण में कही गई बात पर बल देने को ‘बलाघात’ कहा जाता है। अतः निपातों का प्रयोग बलाघात के लिए किया जाता है। ‘बलाघात’ कुछ इस प्रकार होता है, कि एक निपात आते ही संज्ञा अथवा सर्वनाम उसी की ओर झुक जाता है तथा क्रिया से उसी अर्थ में जुड़ जाता है।
विस्मयादिबोधक अव्यय ( व्याकरण से आंशिक )
१. विस्मय बोधक ( आश्चर्य भाव ) — अरे! हें! क्या! हे भगवान! २. हर्ष बोधक ( प्रसन्नता भाव ) — अहा! वाह! क्या बात है! उत्तम! सुंदर! ३. शोक बोधक ( दु:ख भाव ) — ओह! हे राम! हे भगवान! ओहो! ४. खेद बोधक ( खेद भाव ) — ओहो! अरेरेरे! ५. क्रोध बोधक ( आवेश, रौद्र अथवा क्रोध भाव ) — क्या! इतनी हिम्मत! खबरदार! चुप! मुँह संभाल के! ५. घृणा बोधक ( घृणा अथवा कुंठा भाव ) — छि:! छी-छी! थू! थू-थू! धत! हट! हुँह! ६. भय बोधक ( भय अथवा जुगुप्सा भाव ) — बाप रे! बाप रे बाप! त्राहि! त्राहि माम्! भागो! ७. आशीर्वाद बोधक ( मंगल अथवा कल्याण भाव ) — शुभम्! कल्याणम्! मंगलम्! आरोग्यम्! खुश रहो! प्रसन्न रहो! सुखी रहो! जीते रहो! चिरंजीवी रहो! ८. चेतावनी बोधक ( सुरक्षा भाव ) — होशियार! खबरदार! सावधान! बच के! जागते रहो! रुको! ९. प्रशंसा बोधक ( उत्साह भाव ) — शाबाश! बहुत अच्छे! बहुत सुंदर! अति सुंदर! अति उत्तम! वाह! क्या बात है! क्या खूब! बहुत खूब! १०. प्रार्थना बोधक ( शांति भाव ) — ओ३म्! हरिओ३म्! शिव-शिव! अलख निरंजन! शांति!-शांति!
समुच्चयबोधक अव्यय (व्याकरण से आंशिक)
‘समुच्चय’ का शाब्दिक अर्थ है — जोड़ा। समुच्चयबोधक अव्यय जोड़ा बनाने वाले शब्दों को कहते हैं। समुच्चयबोधक भी सदा अपरिवर्तित रहते हैं। इन के स्वरूप पर लिंग, वचन, कारक, काल, देश आदि के परिवर्तन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
परिभाषा — जो अव्यय पद दो शब्दों, दो उपवाक्यों ( वाक्यांशों, पदबंधों आदि) तथा दो वाक्यों को परस्पर ( आपस में ) जोड़ते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं। ( टिप्पणी — उपवाक्यों को वाक्यांश तथा पदबंध भी कहा जाता है। )
उदाहरण — १. और — मधु और सुनंदा पक्की सहेलियाँ हैं। २. तथा — संतरा तथा नारंगी एक ही फल के दो नाम हैं। ३. परंतु — ईश्वर एक है परंतु उसके नाम अनेक हैं। ४. अथवा — साकार अथवा निराकार परमेश्वर हम सब के भीतर वास करता है।


