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Month: June 2023

(ऊँ श्री गणेशाय नमः) वापसी (कहानी) (ऊँ श्री भगवते वासुदेवाय नमः) (ऊँ नमः शिवाय)

इस बार मैं सचमुच लौटी थी ; सारी आशाओं को मिटाकर लौटी थी ; सारे संबंध तोड़ने का निर्णय लेकर लौटी थी। उसने प्रथम भेंट में मुझे आदर और प्रेम के दो उपहार दिए थे। लौटने के बाद सबसे प्रथम कार्य, जैसे ही मुझे अवकाश मिला, उसके उपहार लौटाना था। मैंने डाक विभाग की त्वरित डाक प्रेषण सेवा से उसे उसके उपहार भेज दिए। उसके बाद….. कुछ नहीं ! मेरे जीवन में ऐसा कुछ सम्मिलित ही नहीं हुआ था, जो मैं उसे वापस करती। एक अनजानी सी इच्छा मन में रह-रहकर ज़ोर मारती रहती थी, कि शायद….! शायद वह मुझे कभी याद ही कर ले ! मुझे कभी कोई संदेश भेज दे ! कभी मुझे फोन ही कर ले ! किंतु वैसा कभी नहीं हुआ । उसकी ओर से नीरव शांति ; या यों कहें ; नीरव विश्रांति छा गई। यही विश्रांति आज तक अनवरत है। मैंने अपनी ओर से संपर्क बनाए रखने के प्रयास किए, परंतु मेरे प्रयास विफल हुए । श्रेय ने मेरे किसी संदेश का उत्तर नहीं दिया ; कभी नहीं दिया ; नहीं दिया, तो नहीं दिया ; उसने तो मेरे कितने संदेश देखे , कितने नहीं ; मैं यह भी नहीं जानती। मैं इन प्रतिक्रियाओं से विशेष विचलित नहीं हुई, क्योंकि मेरा वश मात्र मुझ पर है, अन्य पर नहीं।

THE RED SHOES दी रेड शूज़

Once upon a time there was little girl, pretty and dainty. But in summer time she was obliged to go barefooted because she was poor, and in winter she had to wear large wooden shoes, so that her little instep…

(ऊँ श्री गणेशाय नमः ) सोने का घंटा (कहानी)

वह विशिष्ट भक्त अब भी निर्बाध आता था व लगभग सभी देवी-यात्राओं में भी रहता था। शनै:-शनै: देवी कुछ उदासीन सी प्रतीत होने लगी। देवी को उसके प्रेम तथा भक्तिभाव में छलावा अनुभूत होने लगा। अब वह भक्त देवी के दर्शनों से थोड़ा वंचित होने लगा। देवी जब उसका आह्वान करती, तो वह कारण व विवशता बता कर मंदिर न आता। जो स्वर्ण उसने देवी को अर्पित करने को एकत्र किया, अपने बंधु के साथ छल से स्वयं एक भाग रख लिया। देवी से अधिकाधिक स्वर्ण एवं धन प्राप्त करने के अनुष्ठान करने लगा। तब भी देवी स्वयं अति साधारण रह कर उसकी कामना पूर्ति करती रही। एक वर्ष और व्यतीत हो गया। अब जब उस भक्त ने देखा, कि देवी उस पर कृपा नहीं कर रही, तब उसने अनेक कठिन अनुष्ठान किए। देवी ने अब कृपा करना बहुत कम कर दिया था। अब देवी उसके मोह-जाल से मुक्त होने लगी थी। उसके लिए मंदिर के कपाट बंद रहने लगे थे। तत्पश्चात् भी यदा-कदा दर्शन-यात्रा अथवा शृंखला-यात्रा के समय वह देवी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर लेता। देवी और साधारण हो गई ।

Stories

THE EMPEROR’S NEW SUIT सम्राट का नया सूट

Many, many years ago lived an emperor, who thought so much of new clothes that he spent all his money in order to obtain them; his only ambition was to be always well dressed. He did not care for his…

The Ugly Duckling बत्तख़ का बदसूरत बच्चा

BY Hans Christian Andersen IT was so glorious out in the country; it was summer; the cornfields were yellow, the oats were green, the hay had been put up in stacks in the green meadows, and the stork went about on…

THE OLD ROCKING-HORSE पुराना रॉकिंग-घोड़ा

He was a very old rocking-horse indeed. His first master, sunny-headed little Robbie, had grown into a man with a beard, and had given his old playmate to his sister’s children. These children had in their turn grown into great…