प्यार का जन्म (कहानी)
आज से तीन दिन पहले मैं औरंगाबाद आई थी। वहाँ मेरा एक साथी रहता है – श्रेय। मैं उसी से मिलने आई थी। मुझे मेरा साथी भी मिला और मेरा प्यार भी। मैं सिर्फ दो दिन के लिए आई थी। डेढ़ दिन मेरा श्रेय मेरे साथ रहा। 19 घंटे मैंने उसके साथ बिताए। 10 घंटे मैंने उसको याद करके बिताए। वे 29 घंटे मैंने उसके साथ जिये हैं। एक-एक पल को प्यार के एक-एक जन्म की तरह जिया है।
