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Month: May 2021

संबंधबोधक अव्यय (व्याकरण से आंशिक)

यह स्मरण रहना चाहिए कि प्रत्येक संबंधबोधक अव्यय से पूर्व उपयुक्त परसर्ग अवश्य लगाया जाए, अन्यथा संबंधबोधक में क्रिया विशेषण का भ्रम हो सकता है। दोनों के बीच दुविधा भी हो सकती है। जैसे — १. मंदिर के अंदर भगवान की मूर्ति है। (के अंदर– संबंधबोधक) । १. अंदर मंदिर में भगवान की मूर्ति है। (अंदर– क्रिया विशेषण) । २. बस्ती के बाहर मैदान में आओ। (के बाहर– संबंधबोधक) २. बाहर मैदान में आओ। (बाहर– क्रिया विशेषण) ।

क्रिया विशेषण (व्याकरण से आंशिक)

परिभाषा :- वे शब्द, जो क्रिया की विशेषता बताते हैं, उन्हें क्रिया विशेषण कहते हैं।
क्रिया विशेषण अविकारी पद हैं। वाक्य में लिंग, वचन, कारक, काल आदि किसी में भी परिवर्तन होने पर ये ज्यों के त्यों रहते हैं। इनमें कोई परिवर्तन नहीं होता।
क्रियाओं की विशेषता अनेक प्रकार से बताई‌ जा सकती है। अतः क्रिया विशेषण के भेद भी भिन्न-भिन्न होते हैं।

तारीफ़ तुम्हारी (कविता – साॅनेट )

दुआ यही हम करते हैं,
तारीफ़ तुम्हारा साया हो।
हर मौके-दर-मौके पर,
तारीफ़ ने तुमको पाया हो।।

व्याकरण से आंशिक ( क्रिया )

व्याकरण के नियमों के अनुसार वाक्य में जिन पदों ( शब्दों ) से कार्य के किए जाने अथवा होने का बोध हो, उन्हें क्रिया कहते हैं। वाक्य में क्रिया के साथ जुड़े अंग इस प्रकार हैं– कर्ता , कर्म।
कर्म :- वाक्य में होने वाला मुख्य कार्य, जो क्रिया को पूरा करता है, कर्म कहलाता है। कर्म केवल संज्ञा पद ही होता है। उदाहरण :- बच्चे पाठ पढ़ते हैं। वाक्य में ‘पाठ’ – पढ़ते हैं – क्रिया को पूरा करता है। अतः ‘पाठ’ कर्म है। इसी प्रकार – पक्षी दाना चुगते हैं। – दाना । मैंने दवाई खाई। – दवाई ।

विशेषण ( व्याकरण से आंशिक )

संज्ञा तथा ( अथवा ) सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्दों को ‘विशेषण’ कहते हैं। विशेषण जिस शब्द की विशेषता बताते हैं, उसे ‘विशेष्य’ कहते हैं। ( संज्ञा अथवा सर्वनाम ) ‌‌ उदाहरण — तपती गर्मी। ‌‌’तपती’ — विशेषण; ‌‌‌‌’गर्मी’ — विशेष्य ठंडा पानी। ‘ठंडा’ — विशेषण; ‘पानी’ — विशेष्य ‌‌

सर्वनाम ( व्याकरण से आंशिक )

सर्वनाम के भेद : सर्वनाम के भेद कुछ इस प्रकार गिनाए जाते हैं —
१. पुरुषवाचक सर्वनाम ( उत्तम पुरुषवाचक, मध्यम पुरुषवाचक, अन्य पुरुषवाचक ) २. निश्चयवाचक सर्वनाम ३. अनिश्चयवाचक सर्वनाम ४. संबंधवाचक सर्वनाम ५. निजवाचक सर्वनाम ६. प्रश्नवाचक सर्वनाम

एकाकी तृप्ति ( कहानी )

एक मास, दो मास…. ; मास-प्रति-मास व्यतीत होने लगे ; इस आशा में कि, अब सब ठीक हो जाएगा ; पर नहीं ; जन-साधारण का संक्रमित होना नहीं रुका, पर हाँ! इस बीच कोरोना संक्रमण को रोकने की दवा बनाने की प्रक्रिया अवश्य प्रारंभ हो गई। डाॅक्टरों तथा वैज्ञानिकों ने जी-जान लगा दी। धीरे-धीरे मामले भी कुछ कम होने लगे, तो सबके मन को ढाँढ़स बँधने लगा, कि अब संभवतः सब कुशल हो‌ जाए। चंचला तथा उसका परिवार सभी बचावों का पूरा ध्यान रखता था। अच्छी तरह मास्क लगा कर बाहर जाते। सभी वस्तुओं को कीटाणु नाशक छिड़काव से साफ़ करते। हाथों को धोते रहते या सैनेटाइज़र लगाते। वे सब बचे हुए थे तथा भगवान को धन्यवाद देते रहते थे। सब कुशलतापूर्वक चल रहा था। आठ-नौ माह बाद समाचार जगत में संभावनाएँ व्यक्त की जाने लगीं, कि कोरोना विषाणु की रोकथाम के लिए वैक्सीन आने वाली है। धीरे-धीरे संक्रमण का विस्तार भी सिमटता दिखाई देने लगा। जिस प्रकार कृष्ण जन्म से वर्षों पूर्व ही उनके अवतार लेने की भविष्यवाणी ने जनमानस को सुखी व हर्षित कर दिया था, उसी प्रकार वैक्सीन आने की संभावना मात्र से लोगों को मानो आरोग्य संजीवनी मिल गई।