संज्ञा ( व्याकरण से आंशिक )
तो इस प्रकार संज्ञा ‘नाम’ है; ‘पहचान’ है; ‘परिचय’ है । किसी भी व्यक्ति, वस्तु, प्राणी अथवा स्थान का प्रथम परिचय हमें उसके नाम से ही मिलता है। शेष परिचय बाद में होता है।
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यह प्रार्थना मुझे अत्यंत प्रिय है। मेरे स्कूल में प्रतिदिन हुआ करती थी। …. श्री…. ( सहयोग कर्ता )____ ….. मनी ….. इस लिंक के साथ प्रस्तुत छवि हमें किसी प्रियजन द्वारा भेजी गई है।
समास (व्याकरण से आंशिक)
समास — का शाब्दिक अर्थ है — छोटा करना या संक्षिप्त करना। एक बड़े शब्द-समूह को संक्षिप्त करने की प्रक्रिया को समास कहते हैं। सामासित करके अर्थात् , संक्षिप्त करके बनाए गए एक शब्द को समस्त पद कहते हैं। जैसे — घोड़ों से चलने वाली गाड़ी — घोड़ागाड़ी। एक पद बनाने की इस प्रक्रिया को ‘समास’ के नाम से भी जाना जाता है।
विसर्ग संधि (व्याकरण से आंशिक)
विसर्ग का ‘ओ’ बन जाना — यदि विसर्ग ‘अ’ के साथ हो, तथा ‘+’ चिह्न के बाद किसी वर्ग का तीसरा या चौथा वर्ण हो अथवा ‘य’ , ‘र’ , ‘ल’ , ‘व’ , ‘ह’ आदि में से कोई हो, तो नए शब्द में विसर्ग के स्थान पर ‘ओ’ की मात्रा लग जाती है। जैसे — मन: + हर = मनोहर। वय: + वृद्ध = वयोवृद्ध। अध: + गति = अधोगति।
व्यंजन संधि (व्याकरण से आंशिक)
३. ‘त’ संबंधी नियम – क. यदि ‘+’ चिह्न के पहले ‘त् ‘ हो तथा बाद में ‘च्’ या ‘छ’ तो ‘त’ – ‘च’ बन जाएगा। सत् + चरित्र = सच्चरित्र। इसी प्रकार, ‘त’ के बाद ‘+’ चिह्न के बाद ‘ज’ या ‘झ’ हों तो ‘त’ का ‘ज’ बन जाएगा। ‘+’ चिह्न के बाद ‘ठ’ या ‘ड’ हों तो ‘त’ ‘ड्’ में बदल जाएगा। ‘+’ चिह्न के पश्चात ‘ल’ होने पर ‘त’ का ‘ल’ हो जाता है। सत् + जन = सज्जन। उत् + डयन = उड्डयन। उत् + लास = उल्लास।
रक्षक पर भक्षक को वारे : न्याय सिद्धि का दानी ( बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष )
हंस को थोड़ी राहत मिली। उसने आँखें खोल दीं। उतनी देर में वहाँ देवदत्त आ पहुंचे। वे सिद्धार्थ के बड़े भाई थे ; स्वभाव से क्रोधी तथा आखेट के परम लोलुप। आते ही उन्होंने क्रोध में भर कर सिद्धार्थ को आदेश दिया, “यह हंस हमारा आखेट है। इस पर हमारा अधिकार है। इसे तुरंत हमें सौंप दो।” बड़े भ्राता का आदेश टालना परंपरा के विरुद्ध था ; फिर भी साहस कर सिद्धार्थ ने उनसे कहा, “यह आपका आखेट तब था, जब आपने इसे घायल किया था। परंतु इसके प्राणों की रक्षा करने के बाद अब यह हमारा है। हम इसका उपचार करेंगे। स्वस्थ होने के बाद यह स्वतंत्र होगा।” परंतु देवदत्त नहीं माने। वे केवल क्रोधी ही नहीं, हठी भी थे। वे अपने आखेट को छोड़ने के लिए किसी भी दशा में प्रस्तुत न थे। दोनों भ्राताओं के मध्य विवाद बढ़ता गया। अंत में बड़े भाई ने न्यायालय से न्याय माँगने का निश्चय कर लिया।
स्वर संधि (व्याकरण से आंशिक)
४. वृद्धि संधि :- विपरीत स्वरों में से एक अथवा दोनों के दीर्घ रूप में मेल होने पर होने वाले परिवर्तन। जैसे — अ/आ + ए/ऐ = ऐ। एक + एक = एकैक। सदा + एव = सदैव। अ/ आ + ओ/औ = औ। परम + ओज = परमौज। महा + औदार्य = महौदार्य।
उपसर्ग व प्रत्यय (व्याकरण से आंशिक)
उपसर्ग व प्रत्यय दोनों के संबंध में एक और बिंदु महत्त्वपूर्ण है। वह यह कि शब्दांश व मूल शब्द दोनों एक ही समूह के हों; भिन्न-भिन्न नहीं। तत्सम् शब्दांश+तत्सम् मूल शब्द+तत्सम् शब्दांश। तद्भव शब्दांश+ तद्भव मूल शब्द+तद्भव शब्दांश। विदेशी भाषाएँ — समान भाषा शब्दांश तथा समान भाषा मूल शब्द।
SSC GD Constable Syllabus 2021
एसएससी जीडी कांस्टेबल सिलेबस 2021 कर्मचारी चयन आयोग ने कांस्टेबल जीडी भर्ती की अधिसूचना 21 मार्च 2021 को ऑनलाइन जारी की है। जीडी कांस्टेबल के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को मैट्रिक/10वीं कक्षा की परीक्षा पास करनी होगी ।…
Covid revaccination ?
(image copyrights unknown) Some Covid-19 variants are specific to regions of India: B.1.36 (Bengaluru)B.1.36 N440K (southern states)B.1.1.7 (Punjab)B.1.617 E484Q + L452R (Maharashtra). Many of these mutations are also capable of immune escape, and may not make vaccinations successful. Chinese vaccines…
सच का आइना (कहानी)
देखते ही देखते समय गुज़रा और मैं लड़कपन ( किशोरावस्था ) की दहलीज़ पर पहुँच गई। आइना भाने लगा। ममता की दूरी मार के स्थान पर तानों में बदलने लगी। माँ निरंतर मुझे नालायक, असफल, अयोग्य व साधारण होने का एहसास दिलाती रहतीं। मेरी तुलना मोहल्ले की दूसरी लड़कियों से करती रहतीं तथा उन्हें मुझसे अधिक योग्य व चतुर ठहरातीं। धीरे-धीरे उनकी टिप्पणियों ने मेरे हृदय में घर कर लिया।






