भोजपुरी और मराठी
भोजपुरी और मराठी दोनों ही इंडो-आर्यन (हिन्द-आर्य) भाषा परिवार से आती हैं। जहाँ भोजपुरी का विकास ‘मागधी प्राकृत’ से हुआ है, वहीं मराठी ‘महाराष्ट्री प्राकृत’ से निकली है। अलग-अलग शाखाओं से होने के बावजूद, संस्कृत इनकी साझा पूर्वज है, जिसके कारण इन दोनों भाषाओं में गहरी समानताएँ हैं।
यहाँ इन समानताओं का वर्गीकरण (Categorization) और उदाहरण दिए गए हैं:
1. शब्दावली में समानता (Lexical Similarity)
सबसे बड़ी समानता शब्दों में है। दोनों भाषाओं में सैकड़ों शब्द ऐसे हैं जो या तो बिल्कुल समान हैं (तत्सम – सीधे संस्कृत से) या थोड़े बदलाव के साथ बोले जाते हैं (तद्भव)।
| शब्द (हिंदी/अंग्रेजी) | भोजपुरी | मराठी | संस्कृत मूल |
| नाम (Name) | नाम (Naam) | नाव/नाम (Naav/Naam) | नामन् (Naman) |
| हाथ (Hand) | हाथ (Haath) | हात (Haat) | हस्त (Hasta) |
| गाँव (Village) | गाँव (Gaon) | गाव (Gaav) | ग्राम (Grama) |
| पानी (Water) | पानी (Paani) | पाणी (Paani) | पानीय (Paniya) |
| घर (House) | घर (Ghar) | घर (Ghar) | गृह (Griha) |
| दही (Curd) | दही (Dahi) | दही (Dahi) | दधि (Dadhi) |
2. वाक्य संरचना (Sentence Structure – Syntax)
अंग्रेजी (Subject-Verb-Object) के विपरीत, भोजपुरी और मराठी दोनों SOV (कर्ता-कर्म-क्रिया) के नियम का पालन करती हैं। यानी दोनों में क्रिया (Verb) वाक्य के अंत में आती है।
- वाक्य: “मैं घर जा रहा हूँ।”
- भोजपुरी: हम घर जात बानी। (कर्ता – कर्म – क्रिया)
- मराठी: मी घरी जात आहे। (कर्ता – कर्म – क्रिया)
ध्यान दें: दोनों भाषाओं में ‘जाना’ क्रिया के लिए ‘जात’ (Jaat) शब्द का प्रयोग हुआ है, जो इनकी व्याकरणिक समानता दर्शाता है।
3. परसर्ग और कारक (Postpositions/Morphology)
अंग्रेजी में Prepositions (In, On, At) शब्द से पहले लगते हैं, लेकिन भोजपुरी और मराठी में ये शब्द के बाद (Postpositions) लगते हैं।
- संबंध (Possession – का/की/के):
- भोजपुरी: राम के घर (Ram ke ghar)
- मराठी: राम चे घर (Ram che ghar)
- समानता: दोनों में नाम के बाद कारक चिन्ह (के/चे) लगा है।
- अधिकरण (Location – में/अंदर):
- भोजपुरी: घर में (Ghar mein)
- मराठी: घरात (Gharat)
- समानता: मराठी में ‘त’ प्रत्यय लगता है और भोजपुरी में ‘में’, लेकिन दोनों का स्थान शब्द के अंत में ही है।
4. लिपि (Script)
वर्तमान समय में दोनों ही भाषाएँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं।
- यदि आप मराठी पढ़ना जानते हैं, तो आप भोजपुरी भी आसानी से पढ़ सकते हैं (और इसके विपरीत), क्योंकि अक्षर समान हैं।
- ऐतिहासिक तथ्य: पुराने समय में भोजपुरी कैथी लिपि में और मराठी मोडी लिपि में लिखी जाती थी, जो दोनों ही त्वरित लेखन (cursive styles) के लिए थीं।
5. ध्वन्यात्मक समानता (Phonology)
उच्चारण के स्तर पर भी काफी मेल है:
- मूर्धन्य ध्वनियाँ (Retroflex Sounds): दोनों भाषाओं में ट, ठ, ड, ढ का भरपूर उपयोग होता है।
- ‘ळ’ (Lla) का प्रयोग: मराठी की पहचान ‘ळ’ अक्षर है। हालाँकि मानक हिंदी में यह नहीं है, लेकिन कई देहाती भोजपुरी बोलियों में ‘ल’ का उच्चारण इतना भारी होता है कि वह मराठी के ‘ळ’ जैसा सुनाई देता है।
निष्कर्ष:
यद्यपि मराठी व्याकरण थोड़ा अधिक जटिल है (इसमें तीन लिंग होते हैं – पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग, जबकि भोजपुरी में मुख्य रूप से दो ही माने जाते हैं), फिर भी एक भोजपुरी भाषी के लिए मराठी सीखना किसी हिंदी भाषी की तुलना में थोड़ा आसान हो सकता है क्योंकि शब्दों की जड़ें एक ही हैं।
यहाँ कुछ सामान्य बोलचाल के वाक्यों की तुलना दी गई है। इससे आप देख सकते हैं कि दोनों भाषाओं की बनावट और क्रियाओं (Verbs) में कितनी समानता है:
दैनिक बोलचाल के वाक्य
| हिंदी (Hindi) | भोजपुरी (Bhojpuri) | मराठी (Marathi) | समानता का बिंदु |
| आप कैसे हैं? | रउआ कैसन बानी? | तुम्ही कसे आहात? | प्रश्नवाचक शब्द (कैसन/कसे) |
| आपका नाम क्या है? | रउआ नाम का ह? | तुमचे नाव काय आहे? | ‘नाम’ और ‘नाव’ का साझा मूल |
| मैं खाना खा रहा हूँ। | हम खाना खात बानी। | मी जेवण खात आहे। | ‘खात’ क्रिया का समान रूप |
| वह सो रहा है। | उ सूतात बा। | तो झोपला/निजला आहे। | भोजपुरी का ‘सूत’ संस्कृत ‘सुप्त’ से है |
| पानी पिलाओ। | पानी पियाईं। | पाणी पाजा। | ‘पानी’ शब्द |
| अभी समय क्या हुआ है? | अभी कय बजे बा? | आता किती वाजले आहेत? | समय पूछने का लहज़ा |
| मुझे घर जाना है। | हमरा घर जाए के बा। | मला घरी जायचे आहे। | ‘घर’ और ‘जाए/जाय’ (Jaa) धातु |
कुछ दिलचस्प व्याकरणिक समानताएं
ऊपर दी गई तालिका से हम कुछ खास बातें नोटिस कर सकते हैं:
- क्रिया का अंत (Continuous Tense):
- भोजपुरी में रहा/रही के लिए ‘त’ लगता है (जैसे: खात, जात)।
- मराठी में भी वर्तमान काल में ‘त’ का प्रयोग होता है (जैसे: खात, जात)। यह दोनों भाषाओं को हिंदी (रहा/रही) के मुकाबले एक-दूसरे के करीब लाता है।
- सम्मानसूचक शब्द:
- भोजपुरी में बड़ों के लिए ‘रउआ’ या ‘अपनें’ का प्रयोग होता है।
- मराठी में ‘तुम्ही’ या ‘आपण’ का प्रयोग होता है। दोनों में बहुवचन का उपयोग करके सम्मान देने की परंपरा है।
- नकारात्मक वाक्य (Negative Sentences):
- भोजपुरी में: हम ना जाइब।
- मराठी में: मी नाही जाणार।
- दोनों में ‘ना’ का प्रयोग निषेध के लिए प्रमुखता से होता है।