BHU Entrance Exam 2021: Syllabus and Pattern
BHU conducts UET, PET and RET to offer admission into various Undergraduate, Postgraduate and Research Programs. Candidates who qualify the entrance test successfully will get admission into the University and its affiliated Institutions. For Admission into MBA Programme, the admission…
आओ स्कूल चलें
Quality Education has the capability to provide wings to everyone. It teaches us to dream and then to work on it towards reality. Here I deliberately point for significant ‘quality’ part in education. Obviously, education matters, not the degrees. We…
शब्द विचार (व्याकरण से आंशिक)
मूल शब्द से एक नया शब्द निर्मित होने की प्रक्रिया केवल एक प्रकार की ही नहीं है। व्याकरण में विभिन्न नियमों के द्वारा नव शब्द निर्मिति होती है। मूल शब्द में उपसर्ग-प्रत्यय जोड़कर अथवा इन दोनों को एक साथ जोड़कर, स्वर, व्यंजन तथा विसर्ग संधियों द्वारा, समास के द्वारा समासित करके, क्रियाओं की रूप-रचना द्वारा, यहाँ तक कि मात्राएँ जोड़कर भी नए शब्द गढ़े जाते हैं।
*घुमंतू* ( हास्य-व्यंग्य कविता )
हिंदी साहित्य के अग्रणी कवि आदरणीय ‘श्री अरुण कमल जी’ द्वारा रचित कविता ‘नए इलाके में’ पढ़ने के बाद अनेक विचार मन में उत्पन्न हुए। यह कविता कक्षा नवीं हिंदी ‘बी’ की पाठ्य पुस्तक ‘स्पर्श 1’ में पाठ्यक्रम में सम्मिलित है। सोचा, “जब उन्होंने इस कविता को लिखा होगा, संभवतः नव निर्माण प्रगति पर होंगे; तीव्र गति से नए परिवर्तन हो रहे होंगे।” आज का दौर उससे और आगे बढ़ चुका है। तो क्यों न कुछ और नया रचा जाए। अतः श्री अरुण कमल जी तथा उनकी कविता को सादर नमन करते हुए हमने कुछ हास्य-व्यंग्य भरा लिखने की धृष्टता की है। प्रस्तुत है यह कविता :
अपने वर्णों को जानें ( हिंदी वर्णमाला ) व्याकरण से आंशिक
६. जहाँ तक क़ , ख़ , ग़ , ज़ , फ़ व्यंजनों का प्रश्न है, तो ये सभी पृथक व्यंजन नहीं हैं। इनका प्रयोग अरबी-फ़ारसी ( उर्दू ) के शब्दों में होता है। देशज प्रभावों से इन्हें बिना नुक़्ता ( पैर की बिंदी ) भी प्रयोग किया जाता है। उदाहरण — काग़ज़ – कागज। फ़ुरसत – फुरसत , ख़ुश – खुश आदि-आदि।
अपने वर्णों को जानें (अक्षरों की रीति) व्याकरण से आंशिक
स्वरों तथा व्यंजनों के मेल से अक्षर विविध रूपों में बनते हैं – १. संयुक्त व्यंजन – क्त, भ्य, स्त, व्य, स्व आदि-आदि। इन्हें हम पूर्ण रूप से अक्षर नहीं कह सकते क्योंकि इनमें एक से अधिक व्यंजन जुड़े होते हैं। अतः इन्हें संयुक्त व्यंजन कहा जाता है।
अपने वर्णों को जानें। ( व्याकरण से आंशिक)
हम पढ़ते हैं, वर्ण वह सबसे छोटी इकाई है; वह सबसे छोटा अंश है, जिसके और छोटे खंड नहीं किए जा सकते। इन्हीं वर्णों को विधिवत् परस्पर मिलाकर अक्षर, शब्द आदि बनते हैं। अर्थात् स्वरों तथा व्यंजनों के उचित मेल से शब्द प्राप्त होते हैं।
मुझे क्यों याद आते हो? ( कविता )
उसी आवाज़ ने हमको, आशाएँ दे डालीं हैं।
प्रगति की किरण दिखाई है,
उन्नति मार्ग बनाया है।
न बाँधो अब हमें तुम फिर…..,
“श्री!” स्वागतम् संदेश!
कुछ वर्ष पूर्व तक ऐसा प्रतीत होता था कि यह स्थिति केवल हिंदी की है। धीरे-धीरे अनुभव होने लगा कि सभी भारतीय भाषाओं तथा बोलियों की यही दशा होती जा रही है। आज इक्कीसवीं शताब्दी का तीसरा दशक आरंभ हो चुका है। आज की दशा को अनुभव करते हुए अंतरराष्ट्रीय भाषा बन चुकी ‘अंग्रेज़ी’ भी इसी दयनीय स्थिति में पहुँच चुकी है।







